समाज सेवा और धार्मिक जागरण का पर्याय बने सुमित संचेती

Jun 29, 2026 - 23:00
Jun 29, 2026 - 23:05
समाज सेवा और धार्मिक जागरण का पर्याय बने सुमित संचेती

बालोतरा। समाज सेवा, धार्मिक चेतना और संगठनात्मक नेतृत्व के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके सुमित संचेती आज बालोतरा और बीकानेर समाज के एक सक्रिय एवं समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। अपने सरल स्वभाव, दूरदर्शी सोच और समाजहित के कार्यों के कारण उन्होंने समाज में एक विशेष स्थान बनाया है।

सुमित संचेती का जन्म 3 मई 1986 को बिहार राज्य के कटिहार जिले के मदहेपुरा गांव में हुआ। उनके पिता का नाम लक्ष्मीपत संचेती तथा माता का नाम किरण देवी संचेती है। उनका पैतृक गांव राजस्थान के बीकानेर जिले का मोमासर है। पिछले 32 वर्षों से वे बालोतरा में निवास कर रहे हैं और यहीं से उन्होंने अपने सामाजिक एवं व्यावसायिक जीवन को नई दिशा दी।

शिक्षा के क्षेत्र में सुमित संचेती ने बी.कॉम. की उपाधि प्राप्त की। अध्ययन पूर्ण करने के बाद उन्होंने कपड़ा व्यवसाय के क्षेत्र में कदम रखा और आज वे बालोतरा के प्रतिष्ठित कपड़ा व्यवसायियों में गिने जाते हैं। व्यापारिक सफलता के साथ-साथ उन्होंने समाज सेवा को भी अपने जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य बनाया।

सुमित संचेती की संगठनात्मक यात्रा श्री श्याम शरणम् सेवा समिति (रजि.) बालोतरा से शुरू हुई। इस संगठन में उन्होंने एक वर्ष तक सचिव पद की जिम्मेदारी निभाई। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने संगठन को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान की। उनकी कार्यशैली, नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति समर्पण को देखते हुए बाद में उन्हें संगठन का अध्यक्ष चुना गया।

अध्यक्ष पद पर रहते हुए सुमित संचेती ने समाज को एकजुट करने, धार्मिक आयोजनों को बढ़ावा देने तथा युवाओं को सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए अनेक प्रयास किए। उनके नेतृत्व में कई धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित हुए, जिनसे समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचा।

26 फरवरी 2026 को सुमित संचेती को बीकानेर सेवा समिति में उपाध्यक्ष पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। इसी दिन उन्हें बीकानेर युवा शक्ति संगठन का अध्यक्ष भी चुना गया। यह उनके सामाजिक योगदान और समाज में बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण माना जा रहा है।

सुमित संचेती का मानना है कि समाज की उन्नति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के संरक्षण से भी संभव है। इसी सोच के साथ उन्होंने अध्यक्ष बनने के बाद एक महत्वपूर्ण संकल्प लिया। उनका सपना था कि बालोतरा की धरती पर खाटू श्याम जी, सालासर बालाजी और भगवान श्रीराम के भव्य मंदिरों का निर्माण हो, जिससे क्षेत्र में धार्मिक आस्था का केंद्र विकसित हो सके।

अपने इस संकल्प को साकार करने के लिए उन्होंने अथक प्रयास शुरू किए। समाज के सहयोग और श्रद्धालुओं के समर्थन से लगभग 20 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में तीन भव्य मंदिरों का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया। वर्तमान में इन मंदिरों का निर्माण कार्य प्रगति पर है और तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह परियोजना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का भी प्रतीक बन रही है।

सुमित संचेती का कहना है कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं होते, बल्कि वे समाज को जोड़ने, संस्कारों को आगे बढ़ाने और सेवा भावना को प्रोत्साहित करने के केंद्र भी होते हैं। उनका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना है।

आज सुमित संचेती समाज सेवा, धार्मिक कार्यों और संगठनात्मक नेतृत्व के माध्यम से हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। उनकी कार्यशैली और समाज के प्रति समर्पण यह दर्शाता है कि यदि दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच के साथ कार्य किया जाए तो समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

बालोतरा और बीकानेर समाज को उनसे भविष्य में भी अनेक सामाजिक, धार्मिक और जनकल्याणकारी कार्यों की उम्मीद है। समाज के विकास और धार्मिक चेतना के प्रसार के लिए उनका योगदान आने वाले वर्षों में भी प्रेरणास्रोत बना रहेगा।