Adani Group: भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्र की बदलती तस्वीर
भारत के प्रमुख औद्योगिक समूहों में शामिल Adani Group एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। ऊर्जा, बंदरगाह, हवाई अड्डे, कोयला, नवीकरणीय ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में अपनी मजबूत मौजूदगी के कारण यह समूह भारतीय अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहा है। उद्योगपति गौतम अदानी के नेतृत्व में अदानी समूह ने बीते कुछ दशकों में अभूतपूर्व विस्तार किया है।
अदानी समूह की स्थापना वर्ष 1988 में की गई थी। शुरुआत एक छोटे व्यापारिक उपक्रम से हुई, लेकिन समय के साथ यह समूह भारत के सबसे बड़े कॉरपोरेट घरानों में शामिल हो गया। आज अदानी समूह की कंपनियाँ न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं। समूह का मुख्य फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर है, जिसे भारत की आर्थिक प्रगति की रीढ़ माना जाता है।
ऊर्जा क्षेत्र अदानी समूह की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। अदानी पावर और अदानी ग्रीन एनर्जी के माध्यम से समूह पारंपरिक और नवीकरणीय दोनों प्रकार की ऊर्जा के उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विशेष रूप से सौर और पवन ऊर्जा में अदानी ग्रीन एनर्जी का योगदान उल्लेखनीय माना जाता है। सरकार के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप, अदानी समूह ने भविष्य में कार्बन उत्सर्जन कम करने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई है।
बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भी अदानी समूह का दबदबा है। अदानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) भारत का सबसे बड़ा निजी बंदरगाह संचालक है। देश के पश्चिमी और पूर्वी तटों पर स्थित इसके बंदरगाह भारत के निर्यात-आयात व्यापार को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, समूह ने वेयरहाउसिंग और ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क को भी मजबूत किया है।
हाल के वर्षों में अदानी समूह ने हवाई अड्डों के संचालन में भी बड़ा निवेश किया है। मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ और तिरुवनंतपुरम सहित कई प्रमुख हवाई अड्डों का प्रबंधन अदानी समूह के पास है। इस कदम को भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के रूप में देखा जा रहा है।
हालाँकि अदानी समूह की प्रगति के साथ-साथ विवाद भी सामने आए हैं। कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और विपक्षी दलों द्वारा समूह की वित्तीय संरचना और कर्ज को लेकर सवाल उठाए गए। इन आरोपों के बाद शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अदानी समूह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उसका कारोबार पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप संचालित होता है। समूह का दावा है कि वह सभी नियामक मानकों का पालन करता है।
इन चुनौतियों के बावजूद अदानी समूह ने अपनी परियोजनाओं और निवेश योजनाओं को जारी रखा है। समूह का कहना है कि वह दीर्घकालिक विकास पर केंद्रित है और अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता। हाल ही में कई अंतरराष्ट्रीय निवेशकों द्वारा समूह की कंपनियों में रुचि दिखाना इस दावे को मजबूती देता है।
गौतम अदानी का कहना है कि उनका लक्ष्य भारत को वैश्विक इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाना है। वे मानते हैं कि मजबूत बंदरगाह, ऊर्जा सुरक्षा और आधुनिक परिवहन व्यवस्था के बिना देश तेज़ी से विकास नहीं कर सकता। इसी सोच के तहत अदानी समूह बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है।
आने वाले समय में अदानी समूह की भूमिका और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, खासकर जब भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समूह अपनी वित्तीय स्थिरता और पारदर्शिता बनाए रखता है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में एक निर्णायक योगदान दे सकता है।