मुकेश अंबानी: भारत की अर्थव्यवस्था और डिजिटल क्रांति के प्रमुख सूत्रधार

Jan 12, 2026 - 18:09
Jan 15, 2026 - 18:18
मुकेश अंबानी: भारत की अर्थव्यवस्था और डिजिटल क्रांति के प्रमुख सूत्रधार

भारत के सबसे बड़े उद्योगपतियों में शामिल मुकेश अंबानी एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चर्चा में हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (RIL) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में उन्होंने न केवल अपने पारिवारिक व्यवसाय को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया, बल्कि भारत की ऊर्जा, दूरसंचार और खुदरा व्यापार की दिशा भी बदल दी। उनकी व्यावसायिक रणनीतियाँ भारतीय अर्थव्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव डालती हैं।

मुकेश अंबानी का जन्म 19 अप्रैल 1957 को यमन के अदन शहर में हुआ था। उनके पिता धीरूभाई अंबानी को भारतीय उद्योग जगत में दूरदर्शी उद्यमी के रूप में जाना जाता है। पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए मुकेश अंबानी ने रिलायंस को पारंपरिक पेट्रोकेमिकल कंपनी से एक बहुआयामी कॉरपोरेट समूह में परिवर्तित किया। आज रिलायंस इंडस्ट्रीज़ ऊर्जा, रिफाइनरी, दूरसंचार, खुदरा और डिजिटल सेवाओं में अग्रणी भूमिका निभा रही है।

ऊर्जा क्षेत्र में रिलायंस का जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग हब माना जाता है। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देता है। साथ ही, कंपनी धीरे-धीरे पारंपरिक ईंधन से आगे बढ़कर स्वच्छ और हरित ऊर्जा की ओर कदम बढ़ा रही है। मुकेश अंबानी ने भविष्य के लिए ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में बड़े निवेश की घोषणा की है।

मुकेश अंबानी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रिलायंस जियो की शुरुआत मानी जाती है। वर्ष 2016 में लॉन्च हुई जियो ने भारतीय दूरसंचार बाजार में क्रांति ला दी। सस्ते डेटा और तेज़ इंटरनेट सेवाओं ने डिजिटल इंडिया को नई गति दी और करोड़ों लोगों को इंटरनेट से जोड़ा। जियो के आने से न केवल उपभोक्ताओं को लाभ हुआ, बल्कि पूरे टेलीकॉम सेक्टर की संरचना बदल गई।

खुदरा व्यापार के क्षेत्र में रिलायंस रिटेल भी तेजी से विस्तार कर रहा है। किराना से लेकर फैशन और ई-कॉमर्स तक, रिलायंस रिटेल ने देशभर में मजबूत नेटवर्क स्थापित किया है। यह भारत का सबसे बड़ा रिटेलर बन चुका है और लाखों छोटे व्यापारियों को आधुनिक सप्लाई चेन से जोड़ने का दावा करता है।

हाल के वर्षों में रिलायंस ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और टेक्नोलॉजी कंपनियों में भी बड़ा निवेश आकर्षित किया है। फेसबुक (अब मेटा), गूगल और अन्य वैश्विक कंपनियों द्वारा जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेश को भारत की डिजिटल क्षमता पर भरोसे के रूप में देखा गया। इससे रिलायंस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती मिली।

हालाँकि मुकेश अंबानी की सफलता के साथ-साथ आलोचनाएँ भी रही हैं। बाजार में एकाधिकार, प्रतिस्पर्धा और कॉरपोरेट प्रभाव को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। कंपनी का कहना है कि उसका विस्तार नियमों के दायरे में है और वह प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए नवाचार पर जोर देती है।

मुकेश अंबानी को उनकी व्यावसायिक उपलब्धियों के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। वे दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में गिने जाते हैं, लेकिन उनका फोकस दीर्घकालिक निवेश और भारत की विकास यात्रा में योगदान पर केंद्रित बताया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में मुकेश अंबानी की रणनीतियाँ भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, डिजिटल इकोनॉमी और रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभाएँगी। उनकी अगुवाई में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ भारत के आर्थिक भविष्य को आकार देने वाली प्रमुख ताकतों में बनी हुई है।

Hanuman Meena Author and Journalist Business News | hanumanmeena@lakshaymedia.com